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Showing posts from October, 2017

भारत के वो पांच अद्भुत मंदिर जहाँ हर कोई जाना चाहेगा

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१. बृहदेशेश्वर मंदिर बृहदेशेश्वर मंदिर (स्थानीय रूप से "बिग मंदिर" के रूप में जाना जाता है) भारत के तमिलनाडु राज्य में तंजावुर स्थित भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है । यह भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है और चोल अवधि के दौरान तमिल वास्तुकला का एक उदाहरण है । पूरे मंदिर का ढांचा ग्रैनाइट से बना है , जिसका  निकटतम स्रोत मंदिर के पश्चिम में लगभग 60 किमी दूर है। मंदिर के आर्किटेक्ट और इंजीनियर कुंजरा मल्लान राजा राजा राम पेरुन्थाचन थे, जैसा कि मंदिर में मिले शिलालेखों में बताया गया था। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है । २. कैलास मंदिर कैलास (मंदिर) संसार में अपने ढंग का अनूठा वास्तु जिसे मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (760-753 ई0) ने निमित्त कराया था। यह एलोरा (जिला औरंगाबाद) स्थित लयण-श्रृंखला में है। अपनी समग्रता में २७६ फीट लम्बा , १५४ फीट चौड़ा यह मंदिर केवल एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसका निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है। इसके निर्माण के क्रम में अनुमानत: ४० हज़ार टन भार के पत्थारों को चट्टान से हट...

पांच प्रेम कहानियां जो इतिहास में हमेशा अमर रहेगी

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                  भारत हमेसा से दुनिया को प्रेम का पाठ पढाता आया है, समय समय पर भारतवर्ष ने प्रेम को समर्पण के आग में मुस्कुराते हुवे जलते देखा है. वो कुछ लोग जिनके प्रेम के आगे प्रकृति की हर ताकात बेकार थी, आज उनके बारे में जानते है. १. श्री राम मर्यादा पुरुशोस्त्तम राम के बारे में कौन नही जानता, राम का जन्म अयोध्या में हुआ था , वह कोशाल साम्राज्य के शासक थे। भवान राम का विवाह मिथिला में राजा जनक की पुत्री सीता से हुवा था. रामायण के अनुसार एक बार लंकापति रावन छल से सीता का हरण कर लिया, भगवान् राम सीता से मिलने के लिए हिन्द महासागर पर सेतु बनाकर लंका पर चढ़ाई कर दिए थे . यह पुल ४८ किलोमीटर (३० मील) लम्बा है तथा मन्नार की खाड़ी (दक्षिण पश्चिम) को पाक जलडमरूमध्य (उत्तर पूर्व) से अलग करता है। हजारो साल पहले बना यह सेतु आज भी भगवान् राम और सीता जी के प्रेम कहानी को अमर बनाये हुवे है और युगों  युगों तक अमर बनाये रखेगा. "समझ में आएगी जाने कब प्रेम की रित ज़माने को कोई बाँध गया सागर पर सेतु, अपनी प्रीत को पाने को" २. दशरथ म...