पांच प्रेम कहानियां जो इतिहास में हमेशा अमर रहेगी


                  भारत हमेसा से दुनिया को प्रेम का पाठ पढाता आया है, समय समय पर भारतवर्ष ने प्रेम को समर्पण के आग में मुस्कुराते हुवे जलते देखा है. वो कुछ लोग जिनके प्रेम के आगे प्रकृति की हर ताकात बेकार थी, आज उनके बारे में जानते है.


१. श्री राम


मर्यादा पुरुशोस्त्तम राम के बारे में कौन नही जानता, राम का जन्म अयोध्या में हुआ था , वह कोशाल साम्राज्य के शासक थे। भवान राम का विवाह मिथिला में राजा जनक की पुत्री सीता से हुवा था. रामायण के अनुसार एक बार लंकापति रावन छल से सीता का हरण कर लिया, भगवान् राम सीता से मिलने के लिए हिन्द महासागर पर सेतु बनाकर लंका पर चढ़ाई कर दिए थे . यह पुल ४८ किलोमीटर (३० मील) लम्बा है तथा मन्नार की खाड़ी (दक्षिण पश्चिम) को पाक जलडमरूमध्य (उत्तर पूर्व) से अलग करता है। हजारो साल पहले बना यह सेतु आज भी भगवान् राम और सीता जी के प्रेम कहानी को अमर बनाये हुवे है और युगों  युगों तक अमर बनाये रखेगा.

"समझ में आएगी जाने कब प्रेम की रित ज़माने को
कोई बाँध गया सागर पर सेतु, अपनी प्रीत को पाने को"



२. दशरथ मांझी


दसरथ मांझी का जन्म बिहार में गया के करीब गहलौर गांव में हुवा था । इतिहास में उन्हें माउंटेन मैन के नाम से भी जाना जाता है । हाल ही में बॉलीवुड ने जीवन के ऊपर एक फिल्म फिल्माया , जिसका एक डायलाग "जब तक तोड़ेंगे नही, तब तक छोड़ेंगे नही" काफी प्रसिद्द हुवा ।  केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली।  
दशरथ मांझी को गहलौर पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का जूनून तब सवार हुया जब पहाड़ के दूसरे छोर पर लकड़ी काट रहे अपने पति के लिए खाना ले जाने के क्रम में उनकी पत्नी फगुनी पहाड़ के दर्रे में गिर गयी और उनका निधन हो गया। उनकी पत्नी की मौत दवाइयों के अभाव में हो गई, क्योंकि बाजार दूर था। समय पर दवा नहीं मिल सकी। यह बात उनके मन में घर कर गई। इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले दम पर पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकलेगा और अतरी व वजीरगंज की दूरी को कम करेगा। उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में पद्म श्री हेतु उनके नाम का प्रस्ताव रखा। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दशरथ मांझी के नाम पर रखा गहलौर से 3 किमी पक्की सड़क का और गहलौर गांव में उनके नाम पर एक अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव रखा है।


३. हीर-राँझा


हीर पंजाब के झंग शहर में जाटों की सियाल उपजाति के एक अमीर परिवार में पैदा हुई एक बहुत सुन्दर स्त्री थी। धीदो रांझा चनाब नदी के किनारे तख़्त हज़ारा नामक गाँव के एक रांझा उपजाति वाले जाट परिवार के चार लड़कों में सबसे छोटा भाई था। रांझा की मनोहर बांसुरी हीर को उसकी ओर खिंच लाती है और दोनों में प्यार हो जाता है ।  
हीर का चाचा कैदो उन्हें ख़ुश देखकर जलता है। शादी के दिन कैदो हीर के खाने में ज़हर डाल देता है। यह ख़बर सुनकर रांझा उसे बचने दौड़ा आता है लेकिन बहुत देर हो चुकी होती है। रांझा बर्दाश्त से ज़्यादा दुख पाकर उसी ज़हरीले लड्डू को खा लेता है और हीर के बग़ल में दम तोड़ देता है। 


४. सोहणी-महीवाल


सोहनी सिंधु नदी के तट पर रहने वाले कुम्हार तुला की बेटी थी। वह कुम्हार द्वारा बनाए गए बर्तनों पर सुंदर चित्रकारी करती थी। उजबेकिस्तान स्थित बुखारा का धनी व्यापारी इज्जत बेग व्यापार के सिलसिले में भारत आया। सोहनी को देखने के लिए वह रोज सोने की मुहरें जेब में भरकर कुम्हार के पास आता और बर्तन खरीदता। सोहनी भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई। वह सोहनी के पिता के घर में नौकरी करने लगा, उसका नाम महिवाल पड गया, क्योंकि वह भैंसें चराने लगा। 
जब उनके प्रेम के किस्से आसपास फैले तो तुला ने सोहनी को बिना बताए उसकी शादी किसी कुम्हार से कर दी। मगर दोनों प्रेमियों ने मिलना न छोडा। रोज जब रात में सारी दुनिया सोती, सोहनी नदी के उस पार महिवाल का इंतजार करती, जो तैरकर उसके पास आता। महिवाल बीमार हुआ तो सोहनी एक पक्के घडे की मदद से तैरकर उससे मिलने पहुंचने लगी। उसकी ननद ने एक बार उन्हें देख लिया तो उसनेपक्के घडे की जगह कच्चा घडा रख दिया। सोहनी घडे द्वारा नदी पार करने लगी तो डूब गई। महिवाल उसे बचाने के लिए नदी में कूदा, वह भी डूब गया। इस तरह यह दुख भरी प्रेम कहानी खत्म हो गई।


५. मिर्ज़ा-शाहीबा

मिर्जा-साहिबा की कहानी मोहब्बत की ऐसी कसौटी है, जो पुरुष के अभिमान और स्त्री के आत्मसम्मान की सरहदों को छूती, गुस्से और जिद के बचकानेपन से गुजरती, खून के दरिया को लांघती, पश्चाताप के आंसुओं में डूब अंततः मृत्यु की गोद में पनाह पाती है. साहिबा ने अपने भाइयों के साथ मिर्जा का टकराव टालने की भरसक कोशिश की, लेकिन मिर्जा अपने तीन सौ तीरों के अभिमान में चूर था. साहिबा ने भाइयों को बचाने के लिए उसके सारे तीर नष्ट कर दिये, जो मिर्जा के मारे जाने की वजह बनी़।






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~सोनू कुमार सिंह 

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